Wednesday, 5 June 2019

Midcap & small cap share

ये मिडकैप-स्मॉलकैप शेयर आपको कर सकते हैं मालामाल!!

 

ये मिडकैप-स्मॉलकैप शेयर आपको कर सकते हैं मालामाल

मतदाताओं ने अपना फैसला सुना दिया है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) को प्रचंड बहुमत मिला है. नरेंद्र मोदी के दोबारा प्रधानमंत्री बनने से घरेलू शेयर बाजार में तेजी है. बाजार के दिग्गजों का मानना है कि तेजी के इस माहौल में पिटे हुए शेयरों की चमक लौट सकती है. इसमें मिडकैप शेयर प्रमुख होंगे बीते साल सेबी ने म्यूचुअल फंड की स्कीमों के पुनर्वर्गीकरण का आदेश दिया था. इससे कई शेयरों में जोरदार बिकवाली हुई. जनवरी 2018 के बाद से बीएसई मिडकैप इंडेक्स 16 फीसदी तक टूटा है, जबकि इस दौरान सेंसेक्स 16 फीसदी …
बीते साल सेबी ने म्यूचुअल फंड की स्कीमों के पुनर्वर्गीकरण का आदेश दिया था. इससे कई शेयरों में जोरदार बिकवाली हुई. जनवरी 2018 के बाद से बीएसई मिडकैप इंडेक्स 16 फीसदी तक टूटा है, जबकि इस दौरान सेंसेक्स 16 फीसदी ..
इस दौरान इन सेगमेंट की चुनिंदा कंपनियों ने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है. ऐस इक्विटी के आंकड़े बताते हैं कि 38 कंपनियां लगातार चार तिमाही से मुनाफा दर्ज कर रही हैं. इसमें से ज्यादातर नाम मिडकैप कंपनियों के हैं. रिलायंस इंडस्ट्रीज, बजाज फाइनेंस और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज इस सूची में अपवाद है.

मोदी 2.0 में आप इन शेयरों पर खेल सकते हैं दांव

यह बेहद अहम है, क्योंकि कई तिमाही से कमाई में ग्रोथ भारतीय कंपनियों के लिए दूर की कौड़ी रही है. ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज का कहना है कि भारतीय कंपनियों के मुनाफे और GDP का अनुपात 2018 में 2.8 फीसदी रहा, जो 2008 में 5.5 फीसदी था.
मुनाफे के मामले में नियमित प्रदर्शन करने वाली प्रमुख मिडकैप कंपनियों में फेडरल बैंक, मणप्पुरम फाइनेंस, RBL बैंक, जम्मू कश्मीर बैंक, SRF, स्टर्लाइट टेक्नोलॉजीज, DCB बैंक, KPR मिल, विनती ऑर्गेनिक्स, सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज, ग्रेन्यूल्स इंडिया और दीपक नाइट्रेट शामिल हैं.
बीते एक साल में इन कंपनियों के शेयरों ने 5 से 75 फीसदी तक का गोता लगाया है. हालांकि, अब ज्यादातर ब्रोकरेज हाउसेज इन शेयरों को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे हैं. उदाहरण के लिए निर्मल बंग सिक्योरिटीज ने फेडरल बैंक को 135 रुपये के टार्गेट प्राइस के साथ खरीदने की सलाह दी है.
सेंट्रम ब्रोकिंग का मानना है कि DCB बैंक के शेयर की कीमत 250 रुपये तक पहुंच सकती है. फेडरल बैंक और DCB बैंक ने मार्च तिमाही के दौरान मुनाफे में क्रमश: 163 फीसदी औ 50 फीसदी की छलांग लगाई थी. IDBI कैपिटल ने चौथी तिमाही के नतीजों के बाद मणप्पुरम फाइनेंस को 145 रुपये का टार्गेट प्राइस दिया है.
इस सूची में कैप्लिन प्वाइंट लैब्स पराग मिल्क फूड्स, मजेस्टिक ऑटो, वोइथ पेपर फैब्रिक्स, विनसम टेक्सटाइल, LGB फोर्ज, एक्मे स्टार हाउसिंग, TCI फाइनेंस और साइबरटेक सिस्टम्स जैसी कंपनियों के भी नाम शामिल हैं.
मार्च 2018 के बाद से विनती ऑर्गेनिक्स, बजाज फाइनेंस, रिलायंस इंडस्ट्रीज, SRF, TCS, DCB बैंक, RBL बैंक, कॉन्फिडेंस पेट्रोलियम, मजेस्टिक ऑटो और लिंडे इंडिया जैसे शेयरों ने 25 से 108 फीसदी तक की छलांग लगाई है. स्टर्लाइट, विंडसम और कैप्लिन प्वाइंट जैसे शेयर 30 फीसदी से अधिक टूटे हैं.

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Thursday, 9 May 2019

Free stock market tips

अलग-अलग रिस्क लेवल और रिटर्न के अनुसार निवेश का डायवर्सिफिकेशन, किसी भी दूरदर्शी निवेश रणनीति की एक आधारशिला है। कंबाइंड रिस्क को ऑफसेट करने के लिए और प्रत्याशित रिटर्न पाने के लिए अपने निवेश को फैलाकर रखना एक जांचा-परखा तरीका है। लेकिन, ओवरडिफेंसिव निवेशक अपने निवेश के इर्द-गिर्द एक सुरक्षा जाल बुनने की कोशिश करते समय अक्सर बहुत दूर निकल जाते हैं। वे बहुत अधिक प्रॉडक्ट्स में निवेश कर बैठते हैं, जिससे उनके संपूर्ण निवेश पोर्टफोलियो की वृद्धि क्षमता बाधित हो जाती है। इसे निवेश का ओवर-डायवर्सिफिकेशन कहा जाता है। आइए देखते हैं कि ओवर-डायवर्सिफिकेशन आपके निवेश फंड के हेल्थ को किस तरह नुकसान पहुंचा सकता है।


प्रत्याशित निवेश रिटर्न पर डाल सकता है असर

निवेश को अलग-अलग असेट क्लास और प्रॉडक्ट्स में डायवर्सिफाई करने का उद्देश्य प्रत्याशित रिटर्न पर मामूली नुकसान उठाते हुए संपूर्ण रिस्क फैक्टर को कम करना है। इसका मतलब यही है कि कम रिस्क और कम रिटर्न वाले निवेश का परफॉरर्मेंस अधिक रिस्की निवेश के अंडरपरफॉरर्मेंस के कारण होने वाले नुकसान को ऑफसेट कर देगा, जिससे निवेश रूपी नाव पूरी तरह डूबने से बच जाएगी। लेकिन, जब कोई व्यक्ति बहुत सारे प्रॉडक्ट्स में निवेश करता है, तब प्रत्याशित रिटर्न पर इस रिस्क को कम करने वाले मामूली नुकसान की सीमा इस हद तक बढ़ जाती है कि यह रिस्क को कम करने वाले मामूली लाभ को भी समाप्त करने लगता है।
इस तरह, ओवर-डायवर्सिफिकेशन आपके प्रत्याशित रिटर्न को प्रभावित करके खुद को हराने वाले अभ्यास में बदल सकता है। संपूर्ण रिस्क विरोधी लाभ इतना कम और नगण्य हो सकता है कि यह समय पर आपके फाइनैंशल लक्ष्यों को पूरा करने में आपकी मदद नहीं कर सकता है। इसके अलावा, महंगाई और टैक्स की कसौटी पर अपने संपूर्ण रिटर्न का मूल्यांकन करने पर यह समस्या और गंभीर दिखाई दे सकती है।
निवेश के रिस्क को हैंडल करना जरूरी
आपके निवेश पोर्टफोलियो को इस तरह मैनेज किया जाना चाहिए कि आप हमेशा अपने फाइनैंशल लक्ष्यों को पूरा करने के रास्ते पर रह सके और उन लक्ष्यों के अनुसार निवेश रिटर्न पाना सबसे महत्वपूर्ण कीर्तिमान है, जिसे आपको अपनी इस यात्रा में हासिल करना होता है। निवेश के रिस्क को हैंडल करना भी बहुत मायने रखता है, लेकिन लक्ष्यों को पूरा करने के चक्कर में प्रत्याशित रिटर्न को खोकर नहीं।
डायवर्सिफिकेशन में बैलेंस्ड पोजिशन जरूरी
सबसे ज्यादा ध्यान देने लायक बात यह है कि आपको अपने संपूर्ण रिस्क को कम करने के लिए अपने निवेश को फैलाने की कोशिश करते समय एक बैलेंस्ड पोजिशन लेने की कोशिश करनी चाहिए। लेकिन, जैसा कि आप सभी जानते हैं किसी भी चीज की अति अच्छी नहीं होती है, उसी तरह ओवर-डायवर्सिफिकेशन भी आपको अपने लक्ष्य को पूरा करने में मदद नहीं कर पाएगा। असल में, यह आपके प्रत्याशित रिटर्न को नुकसान पहुंचाकर आपके फाइनैंशल लक्ष्यों पर नुकसानदायक असर डाल सकता है। आखिरकार, नुकसान को कम करने के लिए रिटर्न के साथ किया जाने वाला समझौता इतना भी बड़ा नहीं होना चाहिए कि आपको मुनाफा होना ही बंद हो जाए।
ओवर-डायवर्सिफिकेशन मैनेज करना चुनौती 
अपने निवेश को ओवर-डायवर्सिफाई करने के व्यावहारिक पहलू के साथ एक और बड़ी समस्या यह है कि इतने सारे निवेश के परफॉरर्मेंस पर नजर रखना और उनका मूल्यांकन करना अनमैनेजेबल हो सकता है। खास तौर पर इसलिए, क्योंकि अनगिनत सक्रिय निवेश टूल्स (जैसे स्टॉक्स, कमोडिटीज और यहां तक कि कुछ म्यूच्युअल फंड्स भी) पर लगातार निगरानी रखना और उन्हें फिर से कैलिब्रेट करना पड़ सकता है और इतने सारे निवेश साधनों के मामले में अधिकांश निवेशकों के लिए जल्दी से सोच-समझकर कोई फैसला लेना आभासी तौर पर असंभव हो सकता है। इसलिए सिर्फ उतने ही साधनों में निवेश करना बेहतर होता है, जिसमें निवेशक की विशेषज्ञता का लाभ मिल सके और जो निवेशक के रिस्क प्रोफाइल और फाइनैंशल लक्ष्यों के अनुरूप हो।